समरेश प्रजापति
सूरजपुर स्कूल शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा मंगलवार को छत्तीसगढ़ में बच्चों को सीखने सिखाने की प्रक्रिया को जारी रखते हेतु नए-नए पहल शिक्षकों द्वारा अपनाएँ जा रहे कुछ नवाचारी माडल पर चर्चा हेतु मुमकिन है। शीर्षक से ऑनलाइन वेबिनार आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेश के कई शिक्षक, शिक्षाविद् और अधिकारी-कर्मचारियों ने अपने जिले में कोरोना जैसे संकटकाल में बच्चों की पढ़ाई को जारी रखने के लिए किए गए अपने -अपने अनुभव साझा किए ,जिसमें से 8 जिले के सुझाव छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला जी के समक्ष रक्खे गए। इन 8 जिलों में सूरजपुर जिला भी शामिल रहा। सूरजपुर जिले से गौतम शर्मा ने अपने विद्यालय शासकीय प्राथमिक शाला झारपारा में वैकल्पिक शिक्षा व्यवस्था बनाने के लिए किए गये नवाचारी पहल मिस्ड कॉल गुरूजी के बारे में विस्तृत जानकारी प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला और विभाग के आला अधिकारियों के समस्त प्रस्तुत किया । गौतम शर्मा ने वैकल्पिक शिक्षा व्यवस्था के लिए किए अपने नवाचार मिस्ड कॉल गुरूजी के बारे में बताया कि आमतौर पर हमारे यहां अधिकांश बच्चों के पास साधारण मोबाइल होते हैं। और सभी मोबाइल में इंटरनेट की सुविधा नहीं होती है, जिसके कारण ये बच्चे शासन द्वारा चलाए जा रहे ऑनलाइन क्लास से नहीं जुड़ पा रहे है । ऐसे बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए सूरजपुर जिले के शासकीय प्राथमिक शाला झारपारा के शिक्षकों ने अभिनव पहल करते हुए मिस्ड कॉल गुरूजी के नाम से एक वैकल्पिक शिक्षा व्यवस्था प्रारंभ किया है। इस नवाचार का लाभ सीधे उन सभी बच्चों को मिल रहा है ,जिनके पास स्मार्टफोन की सुविधा नहीं है, इस सुविधा के अन्तर्गत पालकों के ऊपर किसी भी प्रकार का वित्तीय भार नहीं आ आएगा और बच्चे सीधे अपने साधारण मोबाइल से सिर्फ एक मिस्ड कॉल करके मिस कॉल गुरुजी से जुड़कर अपनी कक्षानुसार पढ़ाई जारी रखे हुए हैं । इस वैकल्पिक शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से बच्चे कोरोना वायरस के संक्रमण से घर पर पूर्णत: सुरक्षित रहते हुए अपनी पढ़ाई नियमित जारी रख पा रहे हैं । इस कार्य में शिक्षक के साथ सिखाने में रूचि रखने वाले व्यक्ति भी जुड रहे हैं। इनके इस नवाचार मॉडल मिस्ड कॉल गुरूजी को राज्य स्तर पर सराहना मिली ।
